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मोदी सरकार के आठ सालः इन आठ बड़े और कड़े फ़ैसलों के लिए हमेशा जाने जाएंगे पीएम मोदी

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Eight years of Modi government: नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बने आठ साल पूरे होने जा रहे हैं. इस मौक़े पर बीजेपी देशभर में बड़े और भव्य जश्न की तैयारी कर रही है.

मोदी 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री बने थे. जबकि 31 मई 2019 को उन्होंने दूसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी. लिहाज़ा बीजेपी ने 25 मई को मोदी सरकार की आठवीं वर्षगांठ देशव्यापी जश्न की रूपरेखा तैयार करने के लिए अहम बैठक बुलाई है. इसमें सभी केंद्रीय मंत्री शामिल होंगे. इसमें सभी मंत्रियों को मोदी सरकार की उपलब्धियों को जनता के बीच ले जाने की ज़िम्मेदारी दी जाएगी. बीजेपी 30 मई से लेकर 14 मई तक ‘सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण’ की थीम पर कार्यक्रम आयोजित करने जा रही है.

मोदी 2014 में अच्छे दिन लाने का वादा करके सत्ता में आए. हालांकि मध्यम वर्ग के लिए ये अभी भी एक सपने ती तरह है. कोरोना काल में तमाम तरह की आलोचनाओं का सामना करते वाले मोदी ने आपदा में अवसर का रास्ता दिखाया. आत्म निर्भर भारत और वोकल पॉर लोकल का नारा देकर देश के कामगारों, कारीगरों और दस्तकारों को अच्छे भविष्य की उम्मीद बंधाई. पिछले आठ साल में मोदी ने कई कड़े फैसले किए. पुरानी परंपराओं को तोड़ा. नई परंपरा डाली. अपने कई फैसलों पर अडिग रहकर ये संदेश देने की कोशिश की कि वो जो फैसला कर लेते हैं उसे बदलते नहीं. लेकिन तीन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ चले लगभग साल भर चले आंदोलन के बाद मोदी ने तीनों क़ानूनों के वापिस लेकर चौंकाया भी.

इस मौके पर जानते हैं मोदी सरकार के आठ साल में आठ वो उपलब्धियां जिनकी वजह से देश और भारतीय समाज में व्यापक बदलाव हुए हैं. ये ऐसे बड़े और कड़े फैसले हैं जिनके लिए पीएम मोदी को हमेशा याद किया जाएगा.

1. जनकल्याण की दिशा में उठाए अहम क़दम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में गुजरात के एक कार्यक्रम में कहा कि उनका मक़सद जनकल्याणकारी योजनाओं को शत प्रतिशत ज़मीन पर उतारना है. पिछले आठ से में उनकी सरकार ने इस दिशा में बेहतर क़दम उठाए हैं. 28 अगस्त 2014 को देश की जनता को बैंकिंग से जोड़ने के लिए जन-धन योजना की घोषणा की थी. इस के तहत 31 करोड़ से ज़्यादा लोगों के खाते खोले गए. बैंकों ने कैंप लगाकर वंचित लोगों के खाते खोले. अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं में उज्ज्वला योजना का नाम आता है. इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब परिवारों को मुफ्त में रसोई गैस दी गयी. हर घर को पक्की छत देने के लिए केंद्रीय शहरी एवं आवास मंत्रालय 2018 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक करोड़ घरों के निर्माण लक्ष्य रखा. इसे 2022 में पूरा किया जाना है. इस योजना के तहत कच्चे मकान को पक्का बनाने के लिए 2.5 लाख तक की मदद मिलती है. हर घर को बिजली पहुंचाने के लिए 2017 में सौभाग्य योजना की शुरुआत की थी. देश के हर शख्स को बेहतर इलाज के लिए मोदी सरकार ने आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत की है, जिसके तहत पांच लाख रुपये का इलाज मुफ्त में हो सकता है. इन जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थी बीजेपी के लिए एक नए वोट बैंक में तब्दील हो रहे हैं.

2. दुनिया को दिखाया सेना का पराक्रम

नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्रित्व काल में भारतीय सेना ने जबरदस्त पराक्रम देखकर ये साबित किया है कि अब भारत की सैन्य शक्ति दुनिया के किसी भी विकसित देश से कम नहीं है. घर में घुस कर मारने की नीति अपना कर मोदी सरकार ने ये संदेश भी दिया कि वो कड़े फैसले लेने में नहीं हिचकेगी. भारत में घटी आतंकी घटनाओं का बदला लेने के लिए उरी में सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट में एयर स्ट्राइक के ज़रिए मोदी सरकार ने दुनिया को ये बता दिया कि भारत पारंपरिक लड़ाई के साथ अब ग़ैर-पारंपरिक लड़ाई में भी मुंहतोड़ जवाब दे सकता है. उरी में सुरक्षाबलों के कैंप पर आतंकी हमले के बाद 28 सितंबर 2016 को भारतीय सेना की स्पेशल फोर्स ने सर्जिकल स्ट्राइक करके पाकिस्तान के नापाक मंसूबों का मुंहतोड़ जवाब दिया. भारतीय कमांडो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकियों के लॉन्च पैड्स पर हमला कर
उन्हें तबाह कर दिया था. इसके बाद 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में आतंकी हमला हुआ तो भारतीय वायुसेना ने 26 फरवरी को बालाकोट एयर स्ट्राइक से पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया. भारतीय जवानों ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर आतंकियों के ठिकानों को तबाह कर दिया था.

3. जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 का ख़ात्मा

मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में सबसे बड़ा और ऐतिहासिक फैसला जम्मू-कश्मीर को लेकर लिया. जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बनाने का क़दम उठाने के साथ-साथ राज्य को दो हिस्सों में बांट दिया. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया. अनुच्छेद 370 हटाना भारतीय जनसंघ के ज़माने से बीजेपी का मुख्य एजेंडा और मांग रही थी. मोदी सरकार के इस फैसले के बाद कश्मीर में एक देश, एक विधान और एक निशान लागू हो गया है. ये मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है. हालांकि मोदी सरकार के इस फैसला काफी विरोध हुआ लेकिन सरकार ने राष्ट्रीय और अंतर-राष्ट्रीय दबावों के आगे झुकी नहीं. फिलहाल जम्मू-कश्मीर में परिसीमन का काम चल रहा है. बहुत जल्द वहां विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं.

4. एक देश एक टैक्स

भारत में नया गुड्स ऐंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) लंबे समय से अटका हुआ था. मोदी सरकार ने सत्ता में आने के तीन साल बाद संसद से जीएसटी को पास कराया और यह देश में एक जुलाई 2017 से लागू हो गया. देश में कर सुधार की दिशा में यह सबसे बड़ा कदम था. जीएसटी लागू करने का मकसद एक देश- एक कर (वन नेशन, वन टैक्स) प्रणाली है. जीएसटी लागू होने के बाद उत्पाद की कीमत हर राज्य में एक ही हो गई है और राज्यों को उनके हिस्सा का टैक्स केंद्र सरकार देती है. हालांकि जीएसटी के ख़िलाफ़ व्यापारियों में लंबे समय तक रोष रहा. 2017 में व्यापारियों ने जीएसटी का कड़ा विरोध करते हुए गुजरात में बीजेपी को विधानसभा चुनाव हराने का ऐलान किया था. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

5. ग़रीब सवर्णों को आरक्षण

ग़रीब सवर्णों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण का मामला लंबे समय से अटका हुआ था. लंबे समय से देश में इसकी मांग हो रही थी. पिछली कई सरकारों ने इस मांग से सहमति भी जताई थी लेकिन इस लागू करने की हिम्मत किसी ने नहीं दिखाई. मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल के आखिरी समय में इसे लागू करके लोकसभा चुनाव से पहले एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया. मोदी सरकार 2019 के जनवरी में संसद के आखिरी सत्र में अचानक सवर्ण समुदाय को आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण देने का विधेयक लाई और आनन-फानन में संसद के दोनों सदनों से पास कराकर कानूनी अमलीजामा पहना दिया. इसके जरिए सवर्ण समुदाय के लोग सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए आर्थिक आधार पर आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं.

6. कड़े और बड़े आर्थिक फैसले

बीते आठ साल के दौरान मोदी सरकार ने कई बड़े और कड़े आर्थिक फैसले किए. इनमें नोटबंदी को सबसे ऊपर रखा जा सकता है. इसे भले ही सरकार अपनी उपलब्धियों की फेहरिस्त में प्रमुखता स जगह न दे, लेकिन आम आदमी की ज़िंदगी पर इसका सबसे ज़्यादा असर पड़ा है. वैसे दस सरकारी बैंकों का बड़े बैंकों में विलय मोदी सरकार का सबसे साहसिक आर्थिक कदम माना जाता है. इससे वर्क फोर्स का सही इस्तेमाल हुआ और खर्चों में भी कटौती हुई. लेकिन वैश्विक आर्थिक संकट की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था को मिली चुनौतियां सरकार के इन तमाम कामों के असर पर भारी पड़ी. मोदी सरकार के आम बजट से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि अर्थव्यवस्था में कोई क्रांतिकारी सुधार होने जा रहा है. मध्य वर्ग में सरकार की नीतियों को लेकर निराशा लगातार बनी हुई है. मोदी सरकार के लिए आर्थिक चुनौतियां लगातार बड़ी हो रही हैं. कोरोना की पहली लहर में महामारी के फैलाव को रोकने के लिए लागू कि गए लॉडाउन से अर्थव्यवस्था पटरी से उतरी तो अभी तक सही ढंग से पटरी पर नहीं लौटी है. ऐसे में सरकार ने आत्म निर्भरता की दिशा में क़दम बढ़ाया.

7. मुसलमानों से जुड़े अहम फैसले

पिछले आठ साल में मोदी सरकार ने मुस्लिम समुदाय से जुड़े कई अहम फैसले लिए हैं. कई फैसलों की मुस्लिम समुदाय में तीखी प्रतिक्रिया भी हुई. लेकिन समाज के एक बड़े तबके ने इन फैसलों का स्वागत भी किया. अपने पहले कार्यकाल में मोदी सरकार ने मुसलमानों को हज यात्रा के लिए दी जाने वाली सब्सिडी ख़त्म करने का फैसला. साल 2018 में किए गए इस फैसले मुस्लिम समाज की तरफ से स्वागत ही किया गया. दरअसल सब्सिडी राजनीतिक मुद्दा बना हुआ था. मुस्लिम समाज की तरफ से भी सब्सिडी हटाने की मांग हो रही थी. इस फैसले से केंद्र सरकार को 700 करोड़ रुपये की बचत हर साल हो रही है. ऐसे ही सरकार ने सुधारवादी क़दम उठाते हुए 45 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं को बग़ैर पुरुष अभिभावक के हज करने की इजाजत दी. लेकिन तिहरे तलाक के खिलाफ क़ानून बनाना मोदी सरकार का सबसे बड़ा और कड़ा क़दम माना गया. इससे एक साथ दी जाने वाली तीन तलाक पर पाबंदी लग गई. जुलाई 2019 में ‘मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक-2019’ को संसद के दोनों सदनों से पारित कराया गया. एक अगस्त 2019 से तीन तलाक देना कानूनी तौर पर जुर्म बन गया है.

8. नागरिकता क़ानून में बदलाव

देश के नागरिकता क़ानून में संशोधन मोदी सरकार का एक और बड़ा और कड़ा फैसला रहा. बड़ा इसलिए कि आज़ादी के बाद से ही लंबित पड़े इस मामले कोस मोदी सरकार ने कई साल की कानूनी पेचीदगियों की गुत्थी सुलझाते हुए निपटाया. कड़ा इसलिए कि मुस्लिम समाज के तीख विरोध और शाहीन बाग़ में मुस्लिम महिलाओं के कई महीने चले प्रदर्शन के बावजूद मोदी सरकार ने इसे वापस नहीं लिया. मोदी सरकार ने दिसंबर 2019 में संसद के शीतकालीन सत्र में इसे विधेयक को पास कराया. तभी इसका तीखा विरोध शुरू हुआ. विरोध के बीच 10 जनवरी 2020 नागरिकता संशोधन कानून को को अमलीजामा पहनाया गया. इस कानून से पाकिस्तान, अफगानिस्तान और अन्य देशों में रह रहे हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और यहूदियों को भारतीय नागरिकता मिलने में आसानी हुई है.

वैसे तो मोदी सरकार की उपलब्धियों की फेहरिस्त बहुत लंबी है. लेकिन ये उनकी सरकार के वो बड़े फैसले हैं जिन्होंने देश के बड़े जनमानस और समाज पर खासा प्रभाव डाला है. भविष्य में इन फैसलों के लिए मोदी और उनकी सरकार को हमेशा याद किया जाएगा.

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