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ज्ञानवापी मामले में वाराणसी कोर्ट में आज से सुनवाई शुरू, अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद समिति ने दायर की है याचिका

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Highlights ज्ञानवापी विवाद को लेकर जिला अदालत में सुनवाई 26 मई को शुरू हुई थी शृंगार गौरी-ज्ञानवापी मामले में पांच हिंदू महिलाओं ने अगस्त 2021 में मुकदमा दायर किया था

वाराणसीः काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी परिसर में शृंगार गौरी की दैनिक पूजा की अनुमति मांगने वाली हिंदू महिलाओं द्वारा दायर एक मुकदमे की सुनवाई को चुनौती देने वाली अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद समिति की याचिका पर आज वाराणसी जिला अदालत में फिर से सुनवाई शुरू होगी।

गौरतलब है कि ज्ञानवापी परिसर में मस्जिद की देखरेख अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी करती है। 30 मई को जिला जज एके विश्वेश ने मामले की अगली सुनवाई 4 जुलाई को तय की थी।

मुस्लिम पक्ष ने याचिका की स्थिरता के खिलाफ तर्क दिया है। मस्जिद कमेटी के वकीलों में से एक अभय नाथ यादव ने करीब दो घंटे तक कोर्ट में दलीलें पेश की थीं। उन्होंने अपनी आपत्ति के 52 में से 39 बिंदुओं पर अपनी दलीलें पेश कर चुके हैं। जिला सरकार के वकील (सिविल) महेंद्र प्रसाद पांडे ने 30 मई को कहा था, “समिति के अधिवक्ताओं ने सूट के पैरा नंबर 13 से पैरा नंबर 39 तक पढ़ा और अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी की याचिका के पक्ष में दलीलें पेश करके उनका विरोध किया।”

अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद समिति के अधिवक्ताओं में से एक अखलाक अहमद ने कहा कि पांच हिंदू महिलाओं ने व्यक्तिगत रूप से मामला दायर किया है और पूरे हिंदू समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं। अहमद ने कहा, इसलिए, मामला गैर-रखरखाव योग्य है।मुस्लिम पक्ष ने यह भी तर्क दिया था कि यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है क्योंकि ‘पूजा स्थल अधिनियम, 1991’ किसी भी पूजा स्थल के धर्मांतरण पर रोक लगाता है और किसी भी पूजा स्थल के धार्मिक चरित्र को बनाए रखने का आदेश देता है क्योंकि यह 15 अगस्त, 1947 से अस्तित्व में है। यानी देश की आजादी के दिन धार्मिक स्थल की जो स्थिति थी, वही रहेगी।

मुकदमा दायर होने के बाद, एक निचली अदालत ने ज्ञानवापी परिसर के वीडियोग्राफिक सर्वेक्षण का आदेश दिया था, और हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि अभ्यास के दौरान एक ‘शिवलिंग’ पाया गया था। हिंदू याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं में से एक सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने कहा, ‘हमारे पास यह साबित करने के लिए कई तर्क हैं कि मामला कायम है। हम कोर्ट में अपनी दलीलें पेश करेंगे और साबित करेंगे।’

रविवार (3 जुलाई) को एक महिला याचिकाकर्ता राखी सिंह के वकील शिवम गौर ने कहा, ‘हम अपनी दलीलों के साथ तैयार हैं। अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी के अधिवक्ताओं द्वारा अपना सबमिशन पूरा करने के बाद हम उन्हें अदालत में पेश करेंगे।’

बता दें शृंगार गौरी-ज्ञानवापी मामले में पांच हिंदू महिलाओं ने अगस्त 2021 में मुकदमा दायर किया था। सुप्रीम कोर्ट ने 20 मई को शृंगार गौरी-ज्ञानवापी मामले को एक सिविल जज (सीनियर डिवीजन) से जिला जज को ट्रांसफर करते हुए कहा था कि इस मुद्दे की ‘जटिलताओं’ और ‘संवेदनशीलता’ को देखते हुए, बेहतर है कि एक वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी 25-30 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले इस मामले को संभालें।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस पीएस नरसिम्हा भी शामिल थे, ने कहा कि जिला जज ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंधन समिति के आवेदन पर प्राथमिकता से फैसला करेंगे, जो दावा करती है कि हिंदू याचिकाकर्ताओं का मामला पूजा स्थल अधिनियम द्वारा वर्जित है। 1991, जो किसी भी पूजा स्थल के धार्मिक चरित्र को बनाए रखने का आदेश देता है क्योंकि यह 15 अगस्त, 1947 को अस्तित्व में था। मामले को लेकर जिला अदालत में सुनवाई 26 मई को शुरू हुई थी।

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